Thursday, December 29, 2011

अगर रख सको तो एक निशानी...

अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ,
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....
सबको प्यार देने की आदत है हमें,
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे,
कितना भी गहरा जख्म दे कोई,
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं,
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,
जो समझ न सके मुझे, उनके लिए "कौन"
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं,
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे,
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,,,,,
"अगर रख सको तो निशानी, खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं !!


Monday, December 19, 2011

फिर याद आई उसकी .....

फिर याद आई उसकी फिर पलकें हुई नम
भूला हैं हमे वो......उसे भूले तो नहीं हम

माना के सम्बंध नहीं अब, ना ही बातचीत
पर प्यार दिल से अभी तक हुआ नहीं कम

गैरों के दिए जख्म तो रखे नहीं दिल में
हम याद करेंगे मगर अपनों के दिए गम

तूने ही सम्भाला हैं हर दिन मेरे यारब
होता ना तेरा करम तो, मर ही जाते हम....


Friday, December 16, 2011

पांव मेरे मंजिल ए नज़र .....

पांव मेरे मंजिल ए नज़र और किसी का
करता हूँ सफ़र रोज मगर और किसी का

साया है किसी का तो सज़र और किसी का
रहता है यहाँ कोई, है घर और किसी का

वो गुजरे है जिस राह से, मुमकिन ही नहीं है
उस राह से हो जाए गुजर और किसी का

देता हूँ मैं फिर अपने ही दरवाजे पे दस्तक
जब शहर में खुलता नहीं दर और किसी का

फिर जोश मे कर आया है वो होश का सौदा
सर ले के तो लौटा हैं मगर और किसी का.....


रोना भी जो चाहें तो वो.....

रोना भी जो चाहें तो वो रोने नही देता
वो शक्स तो पलकें भी भिगोने नही देता,

वो रोज़ रुलाता है हमे ख्वाब मे आकर
सोना भी जो चाहें तो सोने नही देता,

ये किस के इशारे पे उमड़ आए हैं बादल
है कौन जो बरसात भी होने नही देता

आता है ख़यालों मे मेरे कौन ये अक्सर,
जो मुझको किसी और का होने नही देता,

इक शख्स है ऐसा मेरी बस्ती मे अभी तक ,
जो बोझ अकेले मुझे ढोने नही देता

मैं हूँ के बहाती हूँ तेरी याद मे आँसू,
तू है के अश्कों को पिरोने नही देता,

वो चेहरा अजब है जिसे पा कर मैं अभी तक,
खोना भी चाहूं तो खोने नही देता

थामे हुए है लहरों की हुस्न-ए-बाग कोई तो,
साहिल को समंदर मे डुबोने नही देता....


मेरा होते हुए भी एक साया था .....

कुछ इस तरह वो मेरी ज़िन्दगी मे आया था,
मेरा होते हुए भी एक साया था !!

हवा मे उड़ने की धुन ने ये दिन दिखाया था,
उडान मेरी थी लेकिन सफ़र पराया था !!

मैं अपने वादे पे कायम ना रह सका वरना,
वो थोडी दूर ही जा कर तो लोट आया था !!

ना अब वो घर हैं ना उस घर के लोग याद मुझे,
ना जाने उसने कहाँ से मुझे च्रुराया था !!


तुम जैसा समझते रहे .....

तुम जैसा समझते रहे वैसा तो नहीं मैं,
कांटा हूँ मगर फूल पे चुभता तो नहीं मैं !!

अपनों से तो रूठा हूँ मैं सौ बार बहरहाल,
पर गैरों में जाकर कभी बैठा तो नहीं मैं !!

रोता है अब भी दिल मेरा अक्सर ये सोचकर,
भूला हैं मुझे वो, उसे भूला तो नहीं मैं !!

खुद्दारी की कुछ दाद तो तुम्ही दो मेरी आँखों,
हालात तो रोने के थे रोया तो नहीं मैं !!


सफ़र मे मुश्किले आये तो .....

सफ़र मे मुश्किले आये तो जुर्रत्त और बढती है,
कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढती है !!

बुझाने को हवा के साथ गर बारिश भी आ जाए,
चरागे बे हकीकत की हकीकत और बढती है !!

मेरी कमजोरियों पर जब कोई तनकीद करता है,
वो दुश्मन क्यों ना हो उससे महोब्बत और बढती है !!

अगर बिकने पे आजाओ तो घट जाते हैं दाम अक्सर,
ना बिकने का इरादा हो तो कीमत और बढती है !!


आज तक सहते रहे .....

हर सितम हर ज़ुल्म जिसका आज तक सहते रहे
हम उसी के वास्ते हर दिन दुआ करते रहे

दिल के हाथों आज भी मजबूर हैं तो क्या हुआ
मुश्किलों के दौर में हम हौसला रखते रहे

बादलों की बेवफ़ाई से हमें अब क्या गिला
हम पसीने से ज़मीं आबाद जो करते रहे

हमको अपने आप पर इतना भरोसा था कि हम
चैन खोकर भी हमेशा चैन से रहते रहे

चाँद सूरज को भी हमसे रश्क होता था कभी
इसलिए कि हम उजाला हर तरफ़ करते रहे

हमने दुनिया को बताया था वफ़ा क्या चीज़ है
आज जब पूछा गया तो आसमाँ तकते रहे

हम तो पत्थर हैं नहीं फिर पिघलते क्यों नहीं
भावनाओं की नदी में आज तक बहते रहे !!


जो पत्थर तुमने मारा .....

जो पत्थर तुमने मारा था मुझे नादान की तरह
उसी पत्थर को पूजा है किसी भगवान की तरह

तुम्हारी इन उँगलियों की छुअन मौजूद है उस पर
उसे महसूस करता हूँ किसी अहसान की तरह

उसी पत्थर में मिलती है तुम्हारी हर झलक मुझको
उसी से बात करता हूँ किसी इनसान की तरह

कभी जब डूबता हूँ मैं उदासी के समंदर में
तुम्हारी याद आती है किसी तूफ़ान की तरह

मेरी किस्मत में है दोस्त तुम्हारे हाथ का पत्थर
भूल जाना नहीं मुझे किसी अंजान की तरह !!


क्या शिकायत अपने, बेगाने से.

तन्हाई जब मुक्कदर में लिखी थी,
तो क्या शिकायत अपने, बेगाने से.
हम मिट गए किसी की चाहत मैं,
वो बाज नहीं आते हमें आजमाने से.
हमने दुनिया छोड़ दी किसी की खातिर,
और वो इनकार कर गए हमें अपनाने से.
अगर खुदा मिले तो मांग लूँ दुआ उस से,
प्यार ही मिटा दे इस जमाने से.
जिंदा लांश कभी दर्द महसूस नहीं करती,
चलती थी साँस मेरी किसी के आने से.
हम ने कभी लिखा नहीं था शौक से,
बस कलम चल पड़ी किसी का ख्याल आने से..


एक निशानी हूँ मैं .....

अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ,
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया,
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....
सबको प्यार देने की आदत है हमें,
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे,
कितना भी गहरा जख्म दे कोई,
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं,
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,
जो समझ न सके मुझे, उनके लिए "कौन"
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं,
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे,
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,,,,,
"अगर रख सको तो निशानी, खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं !!


एक नाम याद आता है .....

हर रात एक नाम याद आता है
कभी सुबह कभी शाम याद आता है,
जब सोचता हूँ कर लू दूसरी मोहब्बत
फ़िर पहली मोहब्बत का अंजाम याद आता है!

सजा मिली है उनसें दूर रहने की
ये बात नही है किसी और से कहने की,
हम तो रह लेंगे उनके बिना भी,पर
इन आशुओ को आदत है,उनकी याद में बहने की!

साथ छोड़ के कभी हमसे जुदा मत होना
वफ़ा चाहिए तुमसे,बेवफा मत होना,
रूठे चाहे सारी दुनियाँ हमसे,पर
दोस्त तुम कभी खफ़ा मत होना!

रोयेंगी ये आँखे मुस्कराने के बाद
आएगी रात दिन ढल जाने के बाद,
कभी रूठना ना मुझसे मेरे दोस्त
शायद ये जिन्दगी ना रहे तेरे रूठ जाने के बाद!

रह-रह के उनकी याद सताए तो क्या करे
उनकी याद दिल से ना जाए तो क्या करे,
सोचा था ख्वाबों में मुलाकात होगी,लेकिन
जब नींद ही ना आए तो क्या करे!

मत देख की कोई गुनहगार कितना है
ये देख तेरे साथ वफादार कितना है,
मत सोच की उसे कुछ लोंगो से नफरत है
ये सोच की उसे तुझसे प्यार कितना है!

एक लम्हें में तुम ने जिन्दगी सवार दी
एक लम्हें में तुमने जिन्दगी उजार दी,
कसूर तुम्हारा नही मेरा था
जो इन दो लम्हों में हमने जिन्दगी गुजार दी!


कौन सा रास्ता आसान है .....

किन राहों से दूर है मंजिल कौन सा रास्ता आसान है,
हम जब थक कर रुक जायेंगे औरों को समझायेंगे !!

अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर -दिल हो मुमकिन है,
हम तो उस दिन रो देंगे जिस दिन धोखा खाएँगे !!

तनहा हम रो लेंगे महफ़िल महफ़िल गायेंगे ,
जब तक आंसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे !!

तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं,
देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे !!.


जब तक साँस चलती है .....

उठाना खुद ही पङता है , थका टुटा बदन अपना,
के जब तक साँस चलती है , कोई कन्धा नही देता !!

तनहा तनहा हम रो लेंगे महफ़िल महफ़िल गायेंगे,
जब तक आंसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे !!

तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं,
देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे !!

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो ,
चार किताबें पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे !!


मोहब्बत के सफर में कोई .....

मोहब्बत के सफर में कोई रास्ता नही देता,
ज़मीन वाकिफ नही बनती फलक साया नही देता !!

खुशी और दुख के मौसम सब के अपने अपने होते हैं,
किसी को अपने हिस्से का कोई लम्हा नही देता !!

उदासी जिस के दिल में हो , उसी की नींद उड़ती है,
किसी को अपनी आंखों से , कोई सपना नही देता !!


Thursday, December 15, 2011

हमें इज़हार करना न आया .....

हमें इज़हार करना न आया,
उन्हें प्यार करना न आया,
हम बस देखते ही रह गए,
और वक़्त को थामना न आया ,
वोह चलते चलते इतने दूर चले गए,
हमें रोकना भी न आया,
हमने उनका नाम लिया फिर भी,
शायद उन्हें सुनना न आया|
हमारे तकदीर में उनकी मोहब्बत
थी ही नहीं
उनके दिल में हमारी चाहत
थी ही नहीं,
उनकी मुस्कराहट को हम,
प्यार समझ बेठे
और हमारे प्यार की कोई कीमत थी
ही नहीं,
अब अश्को के हर कतरे में ,
बस उनका ही नाम होता हैं|
दिन रात अपनी मोहब्बत को
याद करना,
दीवानों को और का क्या काम
होता हैं !!


Wednesday, December 14, 2011

सख्त हुआ वो ऐसे .....

सख्त हुआ वो ऐसे, किसी पत्थर के जैसे।
पहले तो ऐसा नहीं था! अब क्या हुआ?
जिसे मेरी आँखों में,आँसू का एक भी कतरा,न था मन्जूर।
मुझे रोता छोड़ कर,चला गया वो दूर।
अब तो जैसे ये आँखें,स्वयं को ही तलाश रही हैं,खो गया हूँ मैं।
सच कहा,खुद से ही अजनबी,हो गया हूँ मैं।
जुदा होकर मैं उससे,अब समझा हूँ जाकर।
बहुत ही भारी पड़ते हैं,ये प्रेम के ढाई आखर।



पानी के बादल ....

ज़हन मैं पानी के बादल अगर आये होते
मैंने मिटटी के घरोंदें ना बनाये होते !!

धूप के एक ही मौसम ने जिन्हें तोड़ दिया
इतने नाजुक भी ये रिश्तें ना बनाये होते !!

 डूबते शहर मे मिटटी का मकाँ गिरता है
तुम ये सोच के मेरी और तो आये होते !!

धूप के शहर मे एक उम्र ना जलना पड़ता
काश हम भी किसी पेड़ के साए होते !!

फल पडोसी के दरख्तों पे ना पकते अगर
मेरे आँगन मे ये पत्थर भी ना आये होते !!


Tuesday, December 13, 2011

हम सब कुछ लुटाते चले गए .....

वो जिसकी हंसी पर हम सब कुछ लुटाते चले गए,
वो मुस्कुराते रहे हम खुद को मिटाते चले गए ,
जिसको मालूम न था मारा प्यार के,
उससे हम दिल लगाते चले गए,
करी ये गलती हमने ज़िन्दगी में,
जिसके सिने में दिल ही न था,
उसे प्यार सिखाते चले गए|

मेरी ज़िन्दगी मुझे यह बता,
मुझे भूल कर तुझे क्या मिला,
मेरी हसरतों का हिसाब दे,
दिल तोड़ कर तुझे क्या मिला,
तेरे चार दिन के प्यार से,
मुझे उम्र भर का ग़म मिला,
मैं टूट कर बिखर गया,
मेरी ज़िन्दगी मुझे यह बता,
मुझे भूल कर तुझे क्या मिला|


चला जाऊंगा .....

तेरी मुश्किल न बताऊंगा, चला जाऊंगा,
अश्क आँखों में छुपाऊंगा, चला जाऊंगा,
मुद्दतों बाद मैं आया हूँ पुराने घर में
खुद को जी भर के रुलाऊंगा, चला जाऊंगा|
उन मौहलत से कुछ भी नहीं लेना मुझ को,
बस तुम्हें देखूंगा, चला जाऊंगा,
चन्द बातें मुझे बच्चों की तरह प्यारी हैं,
उनको सीने से लगाऊंगा, चला जाऊंगा,
अपनी देहलीज़ पे कुछ देर पड़ा रहने दो
अश्क आँखों में चुपाऊंगा, चला जाऊंगा|


कुछ लिखने का मन किया .....

कुछ लिखने का मन किया है
आज बहुत दिनों बाद।

मन किया है, नहीं नहीं….
शायद ज़ख्‍मों का दर्द हरा है
आज बहुत दिनों बाद।

ज़ख्‍मों का दर्द, नहीं नहीं….
शायद ख़ुद से बात हुई है
आज बहुत दिनों बाद।

ख़ुद से बात? हाँ हुई है,
शायद मेरा वक्त हुआ है साथ
आज बहुत दिनों बाद।

न लिख पाने की मजबूरी में तो
रोज़ रोता था मेरा मन,
खाली पन्‍नों पर रोईं हैं आँखें
आज बहुत दिनों बाद।

मन भी वही है, ज़ख्‍म भी वही हैं
दर्द भी है वही,
शायद शब्‍दों ने साथ दिया है
आज बहुत दिनो बाद।

मैं भी वही हूँ, मेरी मजबूरी वही है
और हैं खाली पन्‍ने भी वही
शायद कलम ने साथ दिया है
आज बहुत दिनों बाद…..


Monday, December 12, 2011

किसी की आँखों मे मोहब्बत.....

किसी की आँखों मे मोहब्बत का सितारा होगा,
एक दिन आएगा कि कोई शक्स हमारा होगा !

कोई जहाँ मेरे लिए मोती भरी सीपियाँ चुनता होगा,
वो किसी और दुनिया का किनारा होगा !

काम मुश्किल है मगर जीत ही लूगाँ किसी दिल को,
मेरे खुदा का अगर ज़रा भी सहारा होगा !

किसी के होने पर मेरी साँसे चलेगीं,
कोई तो होगा जिसके बिना ना मेरा गुज़ारा होगा !

देखो ये अचानक ऊजाला हो चला,
दिल कहता है कि शायद किसी ने धीमे से मेरा नाम पुकारा होगा !

और यहाँ देखो पानी मे चलता एक अन्जान साया,
शायद किसी ने दूसरे किनारे पर अपना पैर उतारा होगा !

कौन रो रहा है रात के सन्नाटे मे,
शायद मेरे जैसा तन्हाई का कोई मारा होगा !

अब तो बस उसी किसी एक का इन्तज़ार है,
किसी और का ख्याल ना दिल को ग़वारा होगा !


Friday, December 02, 2011

यु पलट जय जिंदगी तो क्या.....

किताबो  के  पन्ने  पलटते  है  तो  सोचते  है यु पलट  जय  जिंदगी  तो क्या  बात  है!!
मतलब  के लिए  तो सब  ढूंढते  है मुझे  कोई  बिन  मतलब  आ  जाये  तो क्या बात है!!
ख्वाबो  में  जो  पुरे  होते  है सपने  वो  हकीकत  बन  जाये  तो क्या बात है!!
क़त्ल  करके  तो सब ले  जायेंगे  दिल  मेरा  कोई  बातो  से  ले जाये तो क्या बात है!!
शरीफों  की  शराफत  में जो बात न  हो  कोई शराबी  कह  जाये तो क्या बात है!!
जिन्दा  रहने  तक  तो याद  करूँगा  उसको  एक  बार  उसे  याद  आ जाये तो क्या बात है!!